कोरोना : ये कहानी है कलयुग की !
प्रकृति अजेय है ,
ये हम बचपन से सुनते आये है, पर कोरोना के माध्यम से प्रकृति ने इंसान को उसकी ओकाद
बता दी है | आखिर सब इंसान क्या गलत है ! जी नहीं केवल 100 साल पहले के तथाकथित विज्ञान
ने ये बताया की इंसान को कैसे जीना चाहिए, क्या खाना चाहिए , क्या पीना चाहिए, कैसे
रहना है, परिवार कैसे सँभालते है ! पहले भी थे लोग , हज़ारो सालो से चला आ रहा था, पर
100 सालो पुराने विज्ञान ने सबको बताया की 100 साल जीने वाला इंसान जानवर , अशिक्षित
, गवाँर था और 40 की उम्र में घुटने, आँख,
नाक, बीपी, हार्ट ,शुगर , ऑपरेशन आदि हो जाते है वो शिक्षित है, वाह
! आज इसी विज्ञान ने ये सारी बीमारिया दी
है | परिवार के नाम पर केवल पति , पत्नी और बच्चे, वो भी माता-पिता, दादा-दादी,
नाना-नानी सब पीछे छूटते जा रहे है |
कहने को हज़ारो नहीं लाखो बुराइया है इस विज्ञान
की पर अच्छाइया बहुत कम |
आपको पता है पिछले 100 साल के में 17 खतरनाक वायरस आये जिनमे 90 साल में
11 और आखरी 10 साल में में 7 है | आखरी 10 साल में स्वाइन फ्लू , नीपाह
,इबोला,कोरोना आदि | क्या स्वाइन फ्लू, नीपाह, इबोला ख़तम हुआ नहीं फिर कोरोना कैसे ख़तम होगा, मान लो एक बार कोरोना पर विराम लग जायेगा पर स्वाइन
फ्लू की भाती बारिश और सर्दी के मौसम में फिर आएगा | इस बार तो वो भी स्वाइन फ्लू के
साथ आएगा फिर आप वापस घरो में कैद होंगे |
अभी ये हाल है तो आने वाले साल में
गरीबी , आतंकवाद तो दूर इंसान का मकसद केवल अपनी और अपने परिवार की जान बचाना
ही रहेगा |
अखिल क्यों लोग सो
साल जीते थे , क्यों इनको बीमारिया नहीं होती थी , सीधी बात है प्रकृति के अनुसार रहन-
सहन खान-पान | क्यों मेहनत करते थे जमकर , क्यों की प्रकृति का नियम है की इस शरीर
को स्वस्थ रखना है तो इससे पसीना बाहर निकलना चाहिए, हाथ पेर आदि अंगो की कसरत होनी चाहिए जिससे शरीर बीमारियों से दूर रहे पर विकास के नाम पर विज्ञान ने ये किया है की इंसान
बटन दबाये और सब उसके सामने आ जाये , क्या ये नहीं हो रहा है , खाना हो तो पैसे दिए
और खा लेंगे , पर शुद्ध तो कुछ भी नहीं बचा फिर जो खा रहे है वो क्या है , आपको पता
है ये की जहर खा पी रहे है और बोल रहे है इम्युनिटी
पावर काम हो रहा है |
फिर आने वाले 10 साल में जो वायरस आने वाले है
उनका क्या मुकाबला करोगे जो कोरोना से दोगुना
खतरनाक होंगे और आपका शरीर दोगुना कमजोर |
आज भी जो दूरदराज गांव
है जहा आदिवासी रहते है जिन्होंने बाजार तक
नहीं देखे होंगे या बहुत कम, उनके पास खाने के लिए रोटी , कुछ मसाले और वो सब्जिया
जो घर पर ही उगाये है फिर भी 80 साल की उम्र
में भी वो खेतो में इतनी मेहनत कर लेते है फिर भी वो गवाँर है और आप पढ़े लिखे और आपके
बच्चे और आप हर 15 दिन में अस्पताल हो आते है, 40 की उम्र में घुटने, आँख, नाक, बीपी,
हार्ट ,शुगर , ऑपरेशन आदि हो जाते है फिर भी आप समज़दार हो !
में सीधी सी बात बताना
चाहता हु की आप आने वाले 10 साल के ही मेहमान ही हो , ये नोट कर लो जितने आपके आस पास
1 से 50 साल के लोग है उनमे से कितने बचेंगे,
पैसा भी नहीं बचा पायेगा, बच भी जायेंगे तो बीमार होके पड़े रहेंगे, केवल ये गांव के
गवाँर आदिवासी ही अपनी जिंदगी आनंद से जियेंगे |
आखिर ये विज्ञान कहा ले जा रहा है आपको , पहले
जहर खाओ , फिर दवाई खाओ ,दवाई खाके फिर किडनी
, हार्ट ख़राब करो फिर वापस ऑपरेशन कराओ, क्या यही उद्देश्य है आपके जीवन का .....
हम जारी रखेंगे लिखना और आप पढ़ना..कल आपको इसके
आगे पढ़ने को मिलेगा और आपको बताएँगे की इस दर्द भरे जीवन में सुख आएगा या फिर......@jupitermedias